10 Fundamentals About Krishna Janmashtami status in hindi You Didn’t Learn in School

10 Fundamentals About Krishna Janmashtami status in hindi You Didn’t Learn in School

Krishna Janmashtami status in hindi,

10 Fundamentals About Krishna Janmashtami status in hindi You Didn’t Learn in School

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जब उनके सामने जाओ
तो उनको देखते रहना,
मेरा जो हाल पूछें तो
ज़ुबाँ से कुछ नहीं कहना ।
बहा देना कुछ एक आँसू
मेरी पहचान ले जाना ॥
कोई जाये जो वृन्दावन…
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जो रातें जाग कर देखें,
मेरे सब ख्वाब ले जाना,
मेरे आँसू तड़प मेरी..
मेरे सब भाव ले जाना ।
न ले जाओ अगर मुझको,
मेरा सामान ले जाना ॥
कोई जाये जो वृन्दावन…
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मैं भटकूँ दर ब दर प्यारे,
जो तेरे मन में आये कर,
मेरी जो साँसे अंतिम हो..
वो निकलें तेरी चौखट पर ।
‘हरिदासी’ हूँ मैं तेरी..
मुझे बिन दाम ले जाना॥
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कोई जाये जो वृन्दावन
मेरा पैगाम ले जाना
मैं खुद तो जा नहीं पाऊँ
मेरा प्रणाम ले जाना ॥
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जन्माष्टमी की रात झाड़ू को घर में रखें इस स्थान पर माता लक्ष्मी करेंगी मालामाल

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाया जाता है इस दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है इसलिए इस त्यौहार को कृष्ण जनमाष्टमी के नाम से जाता है इस बार यह त्यौहार 2 सितम्बर (रविवार) से प्रारंभ हो रहा है जो कि अगले दिन 3 सितंबर तक चलेगा गृहस्थों को पूर्वोक्त द्वादशाक्षर मंत्र से दूसरे दिन प्रात: हवन करके व्रत का पारण करना चाहिए जिन भी लोगो को संतान न हो वंश वृद्धि न हो, पितृ दोष से पीड़ित हो, जन्मकुंडली में कई सारे दुर्गुण, दुर्योग हो, शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को पूर्ण निष्ठा से करने वाले को एक सुयोग्य संस्कारी,दिव्य संतान की प्राप्ति होती है।

कुंडली के सारे दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाते है और उनके पितरो को नारायण स्वयं अपने हाथो से जल दे के मुक्तिधाम प्रदान करते है जिन परिवारों में कलह-क्लेश के कारण अशांति का वातावरण हो वहां घर के लोग जन्माष्टमी का व्रत करने के साथ निम्न किसी भी मंत्र का जप करें।

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ऊॅ नमो नारायणाय ऊॅ नमों भगवते वासुदेवाय

ऊॅ श्री कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत: क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नम:॥

अथवा

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवाय

गोविन्द, गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवाय

झाड़ू को जन्माष्टमी की रात रखें इस स्थान पर -: घर एक मंदिर है इस मंदिर की साफ-सफाई रखना हर जातक का कर्तव्य है भवन को स्वच्छ व सुन्दर बनाने के लिए सबसे उपयोगी चीज है झाड़ू स्वच्छता की शुरूआत झाड़ू से ही होती है और मां लक्ष्मी का आगमन वहीं होता है जॅहा होती है स्वच्छता अतः झाड़ू एक ऐसा यन्त्र है जिसका अच्छे ढंग से प्रयोग करके घर की दरिद्रता को मिटाकर सुख व समृद्धि लायी जा सकती है।

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1-: झाड़ू कभी भी घर के मुख्यद्वार पर नहीं होनी चाहिए इससे भवन में नकारात्मक उर्जा प्रवेश होती है।

 

2-: भोजन कक्ष में झाड़ू नहीं रखनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती है।

 

3-: झाड़ू को दिन में छुपाकर रखना चाहिए और रात्रि में मुख्यद्वार के सामने रखने से कोई भी नकारात्मक चीज घर में प्रवेश नहीं कर पाती है।

 

4-: घर के लिए 3 झाड़ू एक साथ खरीदना चाहिए मान्यता है कि गुरूवार के दिन घर में पोंछा नहीं लगाना चाहिए ऐसा करने से लक्ष्मी जी रूठ जाती है।5-: पोंछा लागाते समय पानी में थोड़ा नमक डाल लेना चाहिए इससे घर की नकारात्मक उर्जा गायब हो जाती है।

 

6-: झाड़ू को कभी भी खड़ा करके नहीं रखना चाहिए क्योंकि इसे अपशकुन माना जाता है।

 

7-: किसी व्यक्ति अथवा जानवर को कभी झाड़ू नहीं मारनी चाहिए ऐसा करना अपशकुन की श्रेणी में आता है

 

8-: झाड़ू पर भूलकर भी पैर नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे मॉ लक्ष्मी नाराज होती है।

 

9-: यदि घर का मुखिया किसी खास प्रयोजन से निकले तो उसके तुरन्त बाद घर में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए ऐसा करने से बनता काम भी बिगड़ जाता है।

 

10-: भवन में सूर्यास्त के बाद झाड़ू-पोंछा लगाना अशुभ माना जाता है टूटी हुई झाड़ू से घर की साफ-सफाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे घर में दारिद्रता आती है।

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श्री कृष्ण जी के लीला काल का समय था, गोकुल में एक मोर रहता था, वह मोर बहुत चतुर था और श्री कृष्ण का भक्त था, वह श्री कृष्ण की कृपा पाना चाहता था। इसके लिए उस मोर ने एक युक्ति सोची वह श्री कृष्ण के द्वार पर जा पहुंचा, जब भी श्री कृष्ण द्वार से अंदर-बाहर आते-जाते तो उनके द्वार पर बैठा वह मोर एक भजन गाता।

मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
गोपाल सांवरिया मेरे
माँ बाप सांवरिया मेरे

इस प्रकार प्रतिदिन वह यही गुनगुनाता रहता एक दिन हो गया, 2 दिन हो गये इसी तरह 1 साल व्यतीत हो गया, परन्तु श्री कृष्ण ने उसकी एक ना सुनी एक दिन दुखी होकर मोर रोने लगा। तभी वहा से एक मैना उडती जा रही थी, उसने मोर को रोता हुए देखा तो बहुत अचंभित हुई। वह अचंभित इस लिए नहीं थी की मोर रो रहा था वह इस लिए अचंभित हुई की श्री कृष्ण के द्वार पर कोई रो रहा था। मैना मोर के पास गई और उससे उसके रोने का कारण पूंछा वह मोर से बोली -हे मोर तू क्यों रोता हैं तब मोर ने बताया की पिछले एक वर्ष से में इस छलिये को रिझा रहा हु, परन्तु इसने आज तक मुझे पानी भी नही पिलाया। यह सुनकर मैना बोली -में श्री राधे के बरसना से आई हु..तू मेरे साथ वहीं चल,श्री राधे रानी बहुत दयालु हैं वह तुझ पर अवश्य ही करुणा करेंगी। मोर ने मैना की बात से सहमति जताई और दोनों उड़ चले बरसाने की और उड़ते उड़ते बरसाने पहुच गये। राधा रानी के द्वार पर पहुँच कर मैना ने गाना शुरू किया

श्री राधे राधे, राधे बरसाने वाली राधे..

परन्तु मोर तो बरसाने में आकर भी यही दोहरा रहा था

मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
गोपाल सांवरिया मेरे
माँ बाप सांवरिया मेरे

जब राधा जी ने ये सुना तो वो दोड़ी चली आई और प्रेम से मोर को गले लगा लिया, और मोर से पूंछा कि तू कहाँ से आया है। तब मोर बोला -जय हो राधा रानी जी आज तक सुना था की तुम करुणामयी हो और आज देख भी लिया। श्री राधा रानी बोली वह कैसे तब मोर बोला में पिछले एक वर्ष से श्री कृष्ण जी के द्वार पर श्री कृष्ण नाम की धुन गाता रहा हुँ किन्तु श्री कृष्ण ने मेरी सुनना तो दूर कभी मुझको थोड़ा सा पानी भी नही पिलाया..
राधा रानी बोली अरे नहीं मेरे कृष्ण जी ऐसे नहीं है, तुम एक बार फिर से वही जाओ किन्तु इस बार श्री कृष्ण-कृष्ण नहीं राधे-राधे रटना। मोर ने राधा रानी की बात मानली और लौट कर गोकुल वापस आ गया फिर से श्री कृष्ण के द्वार पर पहुंचा और इस बार रटने लगा

जय राधे राधे..

जब श्री कृष्ण ने ये सुना तो भागते हुए आये और उन्होंने भी मोर को प्रेम से गले लगा लिया और बोले हे मोर तू कहा से आया हैं। यह सुनकर मोर बोला – वाह रे छलिये जब एक वर्ष से तेरे नाम की रट लगा रहा था तो कभी पानी भी नही पूछा और जब आज जय राधे राधे..बोला तो भागता हुआ आ गया ! कृष्ण बोले अरे बातो में मत उलझा, पूरी बात बता..! तब मोर बोला में पिछले एक वर्ष से आपके द्वार पर यही गा रहा हुँ

मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
गोपाल सांवरिया मेरे
माँ बाप सांवरिया मेरे

किन्तु आपने कभी ध्यान नहीं दिया तो में बरसाने चला गया, इस प्रकार मोर ने समस्त वृतांत श्री कृष्ण को कह सुनाया। तब श्री कृष्ण बोले – मैने तुझको कभी पानी नहीं पिलाया यह मैने पाप किया है, और तूने राधा का नाम लिया,यह तेरा सौभाग्य है। इसलिए में तुझको वरदान देता हूँ कि जब तक ये सृष्टि रहेगी, तेरा पंख सदैव मेरे शीश पर विराजमान होगा..! और जो भी भक्त राधा का नाम लेगा, वो भी सदा मेरे शीश पर रहेगा..!!
अतः श्री कृष्ण के भक्त प्रेमियों यदि श्री कृष्ण का सानिध्य पाना चाहते हो तो प्रेम से कहिये। राधे राधे जी ।

!! आपका दिन मंगलमय हो ।
श्री कृष्ण शरणम ममः?

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