PM Narendra Modi on Mann ki baat Heath issues !

PM Narendra Modi on Mann ki baat Heath issues !

PM Narendra Modi on Mann ki baat Heath issues हेल्थ की बात PM के साथ

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नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि अब तक दुनिया में 30 करोड़ से अधिक लोग डिप्रेशन (अवसाद) के साथ जी रहे हैं। साल 2005 से 2015 के बीच इस तरह के मामलों में 18 फीसद से अधिक की वृद्धि हुई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के भारत के प्रतिनिधि डॉ हेन्क बेकेदम ने कहा कि साल 2015 में 56 लाख भारतीय अवसाद से पीड़ित हैं। यह देश की कुल आबादी का 4.5 फीसद है। नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे ऑफ इंडिया 2015-16 के अनुसार, काम की परिस्थितियां जैसे वर्क लाइफ बैलेंस में गड़बड़ी, नौकरी की भूमिका में तनाव, कई आंतरिक कारणों जैसे कम आत्मसम्मान आदि के कारण कर्मचारियों की उत्पादकता प्रभावित हो रही है।

यह जानकारी मुंबई की डिजिटल वेलनेस कंपनी ट्रुरुथ वेलनेस के संस्थापक और सीईओ राजेश मुंद्रा ने दी। इस सर्वे को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (एनआईएमएचएएनएस बेंगलूर) ने किया था।

मार्च 31 को जारी की गई डब्लूएचओ की रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकारी बजट का औसतन 3 फीसद हिस्सा ही मानसिक स्वास्थ्य में खर्च किया जाता है। कम आय वाले देशों में कुल सरकारी बजट का एक फीसद और उच्च आय वाले देशों में इसे पांच फीसद तक खर्च किया जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य में निवेश के फायदों का हवाला देते हुए, डब्लूएचओ ने कहा कि अवसाद और चिंता के इलाज में निवेश करने वाले हर एक डॉलर बेहतर स्वास्थ्य और काम करने की क्षमता में यूएस की आय में 4 डॉलर की वापसी लाता है।

डब्ल्यूएचओ प्रेस विज्ञप्ति के चार दिन पहले ही भारत में लोक सभा ने मानसिक स्वास्थ्य विधेयक को पारित किया और आत्महत्या के प्रसासों में कमी लाने की कोशिश की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह विधेयक मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोगों को बेहतर स्वास्

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